बैलगाड़ी

हुर्र हुर्र काका ने कहा और बैलों को हांका
हम भाग पड़े बैलगाड़ी ओर, ट्रेन को किया टाटा
टन- टन बैलों ने सिर हिला गले पड़ी घंटी बजाई
ननिहाल की तरफ चल दिए हम दोनों बहन- भाई।
हरे- हरे खेत चारों ओर, पेड़ों की ठंडी छाँव
ठुमक- ठुमक कर बैल चलें, हम बैठ हिलाते पाँव।
बैलगाड़ी की सवारी है भैया सबसे निराली
न तेल, न बिजली यह गाड़ी बड़ी मतवाली।
बस हौले- हौले हिचकोले खाती
यह गाड़ी हमें ननिहाल पहुँचाती।
तुम भी जब करो गाँव जाने की तैयारी
एक बार जरूर करना बैलगाड़ी की सवारी।

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